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Gulzar poetry | Gulzar Poetry In Hindi & Urdu On Love | Gulzar Shayari life|

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Gulzar Poetry In Hindi on Life

 

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एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा…

 

 

 

लकीरें हैं तो रहने दो
किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खींच दी थी

 

 

 

छोटा सा साया था, आँखों में आया था
हमने दो बूंदों से मन भर लिया…

 

 

 

सामने आया मेरे, देखा भी, बात भी की
मुस्कुराए भी किसी पहचान की खातिर…
कल का अखबार था, बस देख लिया, रख भी दिया

 

 

बेहिसाब हसरते ना पालिये
जो मिला हैं उसे सम्भालिये…

 

gulzar shayari in hindi 2 lines on life

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वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं,
हम भूल गए हैं रख के कहीं

 

 

 

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं

 

 

 

कभी तो चौक के देखे वो हमारी तरफ़,
किसी की आँखों में हमको भी वो इंतजार दिखे

 

 

पलक से पानी गिरा है,
तो उसको गिरने दो
कोई पुरानी तमन्ना,
पिंघल रही होगी

 

 

 

कैसे करें हम ख़ुद को
तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं,
तो तुम शर्ते बदल देते हो

 

 

 

किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,
इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं

 

 

gulzar shayari on life in hindi

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तन्हाई की दीवारों पर
घुटन का पर्दा झूल रहा हैं,
बेबसी की छत के नीचे,
कोई किसी को भूल रहा हैं

 

 

 

शोर की तो उम्र होती हैं
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं

 

 

 

वक्त रहता नहीं कही भी टिक कर,
आदत इसकी भी इंसान जैसी हैं

 

 

 

 

बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है

 

 

 

कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना

 

Gulzar life quotes in hindi

 

gulzar love shayari in hindi 2 lines

gulzar poetry in hindi on life

 

आदमी बुलबुला है पानी का
और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है,
फिर उभरता है, फिर से बहता है,
न समंदर निगला सका इसको, न तवारीख़ तोड़ पाई है,
वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का।

 

 

 

 

बीच आसमाँ में था
बात करते- करते ही
चांद इस तरह बुझा
जैसे फूंक से दिया
देखो तुम….
इतनी लम्बी सांस मत लिया करो

 

 

 

सूरज झांक के देख रहा था खिड़की से
एक किरण झुमके पर आकर बैठी थी,
और रुख़सार को चूमने वाली थी कि
तुम मुंह मोड़कर चल दीं और बेचारी किरण
फ़र्श पर गिरके चूर हुईं
थोड़ी देर, ज़रा सा और वहीं रूकतीं तो

 

 

 

आओ तुमको उठा लूँ कंधों पर
तुम उचकाकर शरीर होठों से चूम लेना
चूम लेना ये चाँद का माथा
आज की रात देखा ना तुमने
कैसे झुक-झुक के कोहनियों के बल
चाँद इतना करीब आया है

 

 

 

 

हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते

 

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दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं

 

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा
देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,
जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा

 

 

 

शब्द नए चुनकर कविता हर बार लिखू
उन दो आँखों में अपना सारा प्यार लिखू
वो में विरह की वेदना लिखू या मिलन की झंकार लिखू
कैसे इन चंद लफ्जो में दोस्तों अपना सारा प्यार लिखू

 

 

 

ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं
ना पास रहने से जुड़ जाते हैं
यह तो एहसास के पक्के धागे हैं
जो याद करने से और मजबूत हो जाते हैं

 

 

 

एक सो सोलह चाँद की रातें
एक तुम्हारे कंधे का तिल
गीली मेहँदी की खुश्बू
झूठ मूठ के वादे
सब याद करादो, सब भिजवा दो
मेरा वो सामान लौटा दो

 

 

 

कुछ अलग करना हो तो
भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं
मगर पहचान छिन लेती हैं

 

 

 

gulzar love shayari in hindi 2 lines

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अच्छी किताबें और अच्छे लोग
तुरंत समझ में नहीं आते हैं,
उन्हें पढना पड़ता हैं

 

 

सुनो…
जब कभी देख लुं तुमको
तो मुझे महसूस होता है कि
दुनिया खूबसूरत है

 

 

 

मैं दिया हूँ
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं

 

 

Gulzar Poetry in Urdu 2 Line

 

درد ہلکا ہے سانس بھاری ہے
جئے جانے کی رسم جاری ہے

dard halka hay sans bhari hay
jiye janay ki rasam jari ha

 

 

 

آئنہ دیکھ کر تسلی ہوئی
ہم کو اس گھر میں جانتا ہے کوئی

aaina dekh kar tasali hui
ham k0 iss ghar main janta ha k0i

 

 

 

ذکر ہوتا ہے جہاں بھی مرے افسانے کا
ایک دروازہ سا کھلتا ہے کتب خانے کا

zikar h0ta hay jahan bhi mery fasany ka
ik darwaza sa khulta ha kutb khany ka

 

 

شام سے آنکھ میں نمی سی ہے
آج پھر آپ کی کمی سی ہے

sham say aankh main nami si ha
aaj phir aap ki kami si ha

 

 

صبر ہر بار اختیار کیا
ہم سے ہوتا نہیں ہزار کیا

sabr har bar ikhtiya kiya
ham say h0ta nahi hazar kiya

 

 

gulzar sahab shayari on love

gulzar poetry in urdu

 

وقت رہتا نہیں کہیں ٹِک کر
عادت اِس کی بھی آدمی سی ہے

waqt rehta nahi kahin tik kar
aadat iss ki bhi aadmi si hay

 

 

 

ایسا خاموش تو منظر نہ فنا کا ہوتا
میری تصویر بھی گرتی تو چھناکا ہوتا

aisa kham0sh tu manzar na fana ka h0ta
meri tasveer bhi girti tu chanaka h0ta

 

 

زندگی یوں ہوئی بسر تنہا
قافلہ ساتھ اور سفر تنہا

zindagi y0un hui basar tanha
kafla sath aur safar tanha

 

 

 

مجھے اندھیرے میں بے شک بٹھا دیا ہوتا
مگر چراغ کی صورت جلا دیا ہوتا

mujhy andhery main beshak bitha diya h0ta
magar charagh ki surat jala diya h0ta

 

 

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gulzar poetry on life in hindi

 

آپ کے بعد ہر گھڑی ہم نے
آپ کے ساتھ ہی گزارا ہے

aap kay baad har ghari ham nay
aap kay sath hi guzara ha

 

 

اپنے سائے سے چونک جاتے ہیں
عمر گزری ہے اس قدر تنہا

apnay saye say ch0nk jatay han
umer guzri ha iss qadar tanha

 

 

راکھ کو بھی کرید کر دیکھو
ابھی جلتا ہو کوئی پل شاید

rakh k0 bhi kureed kar dekh0
abhi jalta h0 k0i pal shayad

 

آگ میں کیا کیا جلا ہے شب بھر
کتنی خوش رنگ دکھائی دیتی ہے

aag main kiya kiya jala hay shab bhar
kitni khush rang dikhai deti hay

 

 

gulzar shayari in hindi 2 lines on life

Gulzar Poetry On Life

 

دِن گُزرتا نہیں ہے لوگوں میں
رات ہوتی نہیں بسر تنہا

din guzarta nahi hai l0g0n main
raat h0ti nahi basar tanha

 

 

رُکے رُکے سے قدّم رُک کے بار بار چلے
قرار دے کے تیرے ، در سے بے قرار چلے

rukay rukay say qadam ruk ruk kay bar bar chalay
qarar daay kay teray ddar say beqarar chalay

 

 

پیڑ پر پک گیا ہے پھل شاید
پھر سے پتھر اُچھالتا ہے کوئی

pairr per pak giya hai phal shayad
phir say pathar uchalta hai k0i

 

 

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Gulzar Poetry on Love In Hindi

 

 

کوئی خاموش زخم لگتی ہے
زندگی ایک نظم لگتی ہے

k0i kham0sh zakham lagti hai
zindagi aik nazam lagti hai

 

 

ہم نے دروازے تک تو دیکھا تھا
پھر نہ جانے گئے کِدھر تنہا

ham nay darwazy tak tu dekha tha
phir na janay gaye kidhar tanha

 

 

دِل میں کچھ یوں سنبھالتا ہوں غم
جیسے زیور سنبھالتا ہو کوئی

dil main kuch y0un sanbhalta h00n gham
jaisy zewar sanbhalta h0 k0i

Gulzar Poetry on waqt

 

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gulzar poetry on love

 

 

maiñ uḌte hue panchhiy0ñ k0 Darātā huā
kuchaltā huaa, ghaas kī kalġhiyāñ
girātā huā gardaneñ in daraḳht0ñ kii, chhuptā huā
jin ke pīchhe se
niklā chalā jā rahā thā v0 sūraj
ta.āqub meñ thā us ke maiñ!
giraftār karne gayā thā use
j0 le ke mirī umr kā ek din bhāgtā jā rahā thaa!

 

 

Gulzar Poetry on Love in Urdu

 

 

Tumahray Khawab Se Har Shab Lapat Ke S0tay Hain
Sazayen Bhaij D0 Hum Ne Khataien Bhaiji Hain

 

 

 

 

Ruke Ruke Se Qadam Ruk Ke Baar Baar Chalay
Qarar Day Ke Tre Dar Se Be Qarar Chalay

 

 

 

gulzar shayari on life in hindi

gulzar poetry on waqt

 

W0h Aik Din Aik Ajnabi K0
Meri Kahani Suna Raha Tha

 

 

Khushbu Jaisay L0g Miley Afsaanay Mein
Aik Purana Khat Kh00la Anjanay Mein

 

 

gulzar poetry urdu

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Ham Ne Aksar Tumhari Rah0n Mein
Ruk Kar Apna Hi Intezzar Kia

 

 

Dil Par Dastak Dene K0n Aa Nikla Hai
Kis Ki Aahat Suntan Hun Werane Mein

 

 

 

Chand Umeedain Nich0ri Thi Tu Aahen Tapki
Dil K0 Piglaen Tu H0 Sakta Hai Sansen Niklen

 

 

Apne Saye Se Ch0nk Jate Hain
Umar Guzri Hai Is Qadar Tanha

 

 

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Din Kuch Aesy Guzarta Hai K0i
Jese Ehsaan Utarta Hai K0i

 

 

 

Aap Ke Bad Har Garhi Ham Ne
Aap Ke Sath Hi Guzari Hai

 

 

gulzar shayari in hindi 2 lines

 

 

 

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ

 

 

 

 

यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता

 

 

 

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आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

 

 

 

 

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

 

 

 

 

आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

 

 

 

 

तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं

 

 

 

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हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

 

 

 

 

ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है

 

 

 

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काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी
तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी

 

 

 

 

खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है

 

 

 

 

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

 

 

 

 

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था

 

 

 

 

कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है

 

 

 

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काई सी जम गई है आँखों पर
सारा मंज़र हरा सा रहता है

 

 

 

 

उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये पैरहन उतार चले

 

 

 

 

 

सहर न आई कई बार नींद से जागे
थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले

 

 

 

 

कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया
जब भी अपनी रह चलने की कोशिश की

 

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gulzar shayari in hindi 2 lines on life

 

 

 

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

 

 

 

 

कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

 

 

 

 

आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद

 

 

 

बहुत अंदर तक जला देती हैं,
वो शिकायते जो बया नहीं होती

 

 

 

 

क सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं

 

 

 

 

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तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं

 

 

 

 

घर में अपनों से उतना ही रूठो
कि आपकी बात और दूसरों की इज्जत,
दोनों बरक़रार रह सके

 

 

 

 

कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें

 

 

 

 

कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे

 

 

 

 

शायर बनना बहुत आसान हैं
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए

 

Gulzar Shayari in Hindi on friendship

 

ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ
बस बचपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं

 

 

 

 

बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे हैं

 

 

 

 

कुछ जख्मो की उम्र नहीं होती हैं
ताउम्र साथ चलते हैं, जिस्मो के ख़ाक होने तक

 

 

 

 

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

 

 

 

gulzar poetry on love in hindi

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कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता

 

 

 

 

समेट लो इन नाजुक पलो को
ना जाने ये लम्हे हो ना हो
हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल
उन पलो में हम हो ना हो

 

 

 

 

उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे

 

 

 

Gulzar Short History

Gulzar Naseem is a name that is unique. Gulzar’s real name for films for his best songs is Sampiran Singh Kalra. He was born on August 18, 1944 in the village of Dina in Lake District Which is now in Pakistan.He worked as a garage mechanic before coming to the movies.Gulzar started writing at an early age but his son did not like it.

But still he continued to write and one day due to his hard work he has become a big name in Bollywood.He gave the sign for the 1973 film Koshish.He had worked as an assistant with Bimal Rai in the Bengali film Apna Jin.What he wrote for the film to reveal to us is still heard in nine schools today.In this way, a poet offered immense love, whose heart was pounding.

He wrote a whole poem in the name of Rakhi in one night.He wrote songs for the films of Azan Rahi before the wedding.What is the real name of Gulzar Sahib? There are rumors of fun poetry but how did this request come into Gulzar’s life? The answer to this question is also his own story. He was fond of writing. Like every time, he knew that Gulzar should stop quitting writing and become a picture joker. So Gulzar Sahib changed his name. He started writing and became known as Rakha. He lives among us today and his poetry is not presented in the country. He is also old

 

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Mirza Muhammad Rafi Sauda poetry in Urdu | Sauda Ghazal, Qaseda,

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Mirza Muhammad Rafi Sauda poetry in Urdu. Latest collection sauda shayari, Ghazal, Nazam, Qaseda, in Urdu and Hindi available. You can share Sauda poetry on social media like Facebook and whats app. Here all kind of poets poetry available in Urdu. We hop yo like Rafi Sauda poetry in Urdu.

 

Mirza Muhammad Rafi Sauda poetry in Urdu.

 

 

mirza muhammad rafi sauda poetry

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گر تجھ میں ہے وفا تو جفاکار کون ہے
دل دار تو ہوا تو دل آزار کون ہے
مرزا محمد رفیع سودا

Gar Tujh Men Hai Vafa Tò Jafakar Kaun Hai
Dil-Dar Tu Hua Tò Dil-Azar Kaun Hai
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

میں نے تم کو دل دیا اور تم نے مجھے رسوا کیا
میں نے تم سے کیا کیا اور تم نے مجھ سے کیا کیا
مرزا محمد رفیع سودا

Main Ne Tum Kò Dil Diya Aur Tum Ne Mujhe Rusva Kiya
Main Ne Tum Se Kya Kiya Aur Tum Ne Mujh Se Kya Kiya

 

سوداؔ خدا کے واسطے کر قصہ مختصر
اپنی تو نیند اڑ گئی تیرے فسانے میں
مرزا محمد رفیع سودا

‘Sauda‘ Khuda Ke Vaste Kar Qissa Mukhtasar
Apni Tò Niind Ud Gai Tere Fasane Men
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

Mirza Rafi Sauda ka taruf

Mirza Rafi Sauda ka taruf

سوداؔ تو اس غزل کو غزل در غزل ہی کہہ
ہونا ہے تجھ کو میرؔ سے استاد کی طرف
مرزا محمد رفیع سودا

‘Sauda‘ Tu Is Ghazal Kò Ghazal-Dar-Ghazal Hi Kah
Hòna Hai Tujh Kò ‘Mir‘ Se Ustad Ki Taraf
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

ہے مدتوں سے خانۂ زنجیر بے صدا
معلوم ہی نہیں کہ دوانے کدھر گئے
مرزا محمد رفیع سودا

Hai Muddatòn Se Khana-e-Zanjir Be-Sada
Maalum Hi Nahin Ki Divane Kidhar Gae
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

دل مت ٹپک نظر سے کہ پایا نہ جائے گا
جوں اشک پھر زمیں سے اٹھایا نہ جائے گا
مرزا محمد رفیع سودا

 

Dil Mat Tapak Nazar Se Ki Paaya Na Jaega
Juun Ashk Phir Zamin Se Uthaya Na Jaega
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

 

گلہ لکھوں میں اگر تیری بے وفائی کا
لہو میں غرق سفینہ ہو آشنائی کا
مرزا محمد رفیع سودا

Gila Likhun Main Agar Teri Bevafai Ka
Lahu Men Gharq Safina Hò Ashnai Ka
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

sauda ki ghazal

sauda ki ghazal

 

نسیم ہے ترے کوچے میں اور صبا بھی ہے
ہماری خاک سے دیکھو تو کچھ رہا بھی ہے
مرزا محمد رفیع سودا

Nasim Hai Tire Kuche Men Aur Saba Bhi Hai
Hamari Khaak Se Dekhò Tò Kuchh Raha Bhi Hai
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

سمجھے تھے ہم جو دوست تجھے اے میاں غلط
تیرا نہیں ہے جرم ہمارا گماں غلط
مرزا محمد رفیع سودا

Samjhe The Ham Jò Dòst Tujhe Ai Miyan Ghalat
Tera Nahin Hai Jurm Hamara Guman Ghalat
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

سوداؔ جو ترا حال ہے اتنا تو نہیں وہ
کیا جانیے تو نے اسے کس آن میں دیکھا
مرزا محمد رفیع سودا

‘Sauda‘ Jò Tira Haal Hai Itna Tò Nahin Vò
Kya Janiye Tu ne Use Kis Aan Men Dekha
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

Sauda ki qasida nigari in Urdu

Sauda ki qasida nigari in Urdu

 

سوداؔ جو بے خبر ہے وہی یاں کرے ہے عیش
مشکل بہت ہے ان کو جو رکھتے ہیں آگہی
مرزا محمد رفیع سودا

‘Sauda‘ Jò Be-Khabar Hai Vahi Yaan Kare Hai Aish
Mushkil Bahut Hai Un Kò Jò Rakhte Hain Agahi
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

جس روز کسی اور پہ بیداد کرو گے
یہ یاد رہے ہم کو بہت یاد کرو گے
مرزا محمد رفیع سودا
Jis Ròz Kisi Aur Pe Bedad Karòge
Ye Yaad Rahe Ham Kò Bahut Yaad Karòge
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

ساقی ہماری توبہ تجھ پر ہے کیوں گوارہ
منت نہیں تو ظالم ترغیب یا اشارہ
مرزا محمد رفیع سودا

Saaqi Hamari Tauba Tujh Par Hai Kyuun Gavara
Minnat Nahin Tò Zalim Targhib Ya Ishara
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

Sauda rekhta

Sauda rekhta

موج نسیم آج ہے آلودہ گرد سے
دل خاک ہو گیا ہے کسی بے قرار کا
مرزا محمد رفیع سودا

 

Mauj-e-Nasim Aaj Hai Aluda Gard Se
Dil Khaak Hò Gaya Hai Kisi Be-Qarar Ka
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

 

فراق خلد سے گندم ہے سینہ چاک اب تک
الٰہی ہو نہ وطن سے کوئی غریب جدا
مرزا محمد رفیع سودا
Firaq-e-Khuld Se Gandum Hai Sina-Chak Ab Tak
Ilahi Hò Na Vatan Se Kòi Gharib Juda
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

عبث تو گھر بساتا ہے مری آنکھوں میں اے پیارے
کسی نے آج تک دیکھا بھی ہے پانی پہ گھر ٹھہرا
مرزا محمد رفیع سودا

Abas Tu Ghar Basata Hai Miri Ankhòn Men Ai Pyare
Kisi Ne Aaj Tak Dekha Bhi Hai Paani Pe Ghar Thahra
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

 

 

 

ہر سنگ میں شرار ہے تیرے ظہور کا
موسیٰ نہیں جو سیر کروں کوہ طور کا
مرزا محمد رفیع سودا

Har Sang Men Sharar Hai Tere Zuhur Ka
Muusa Nahin Jò Sair Karun Kòh Tuur Ka
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

 

بدلا ترے ستم کا کوئی تجھ سے کیا کرے
اپنا ہی تو فریفتہ ہووے خدا کرے
مرزا محمد رفیع سودا

Badla Tire Sitam Ka Kòi Tujh Se Kya Kare
Apna Hi Tu Farefta Hòve Khuda Kare
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

 

 

دل کے ٹکڑوں کو بغل گیر لئے پھرتا ہوں
کچھ علاج اس کا بھی اے شیشہ گراں ہے کہ نہیں
مرزا محمد رفیع سودا

Dil Ke Tukròn Kò Baġhal-Gir Liye Phirta Huun
Kuchh Ilaaj Is Ka Bhi Ai Shisha-Giran Hai Ki Nahin
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

 

 

کہیو صبا سلام ہمارا بہار سے
ہم تو چمن کو چھوڑ کے سوئے قفس چلے
مرزا محمد رفیع سودا
Kahiyò Saba Salam Hamara Bahar Se
Ham Tò Chaman Kò Chhòd Ke Su-e-Qafas Chale
Mirza Muhammad Rafi Sauda

 

 

 

Sauda Shayari

 

 

Mat Pòch Ye Ke Raat Kati Kun Kr Tujh Baghair
Is Guftagu Se Faida Payare Guzar Gayi

 

 

 

 

 

Main Ne Tum Kò Dil Diya Aur Tum Ne Mujhe Ruswa Kiya
Mein Ne Tum Se Kya Kia Aur Tum Ne Mujh Se Kya Kia

 

 

 

 

Tera Khat Aane Se Dil Kò Mere Aaram Kya Hò Ga
Khuda Jane Keh Is Aaghaz Ka Anjam Kya Hò Ga

 

 

 

 

Adam Ka Jisam Jab Ke Anasar Se Mil Bana
Kuch Aag Bach Rahi Thi Sò Aashiq Ka Dil Bana

 

 

 

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Rahat indori poetry | Rahat Indri Love Status | Nazam |Ghazal| Hindi&Urdu|

rahat indori love shayari in urdu

Rahat indori poetry and Status on love in Hindi and Urdu available. Rahat indori Shayari 2 line ghazal and nazam in urdu text get form here. We have daily uploads of all poets Shayari in Hindi and Urdu.

Read here the famous Shayari of Rahat indor in Hindi. The latest collection of Rahat indori poetry with images download in this post.

 

 

Rahat indoor Shayari

 

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Ghar kè bahir dhondta rèhta hon dunya
Ghar kè andar dunya dari rèhti hai

 

 

 

 

Sari basti qadmon main hai, yè bhi ik fankari hai
Warna badan ko chor kè apna jo kuch hai sarkari hai

 

 

 

 

 

Maza Chakha Kè Hi Mana Hun Mèin Bhi Dunya Ko
Samaj Rahi Thi Kèh Aèsè Hi Chor Dun Ga Usay

 

 

 

rahat indori shayari in punjabi

rahat indori poetry in hindi

 

Aik Hi Nadi Kè Hain Yèh Do Kinarè Dostoo
Dostana Zindagi Sè Mout Sè Yaari Rakho

 

 

 

 

Yè Saanèha To Kisi Din Guzarnè Wala Tha
Main Bach Bhi Jata To Ik Roz Marnè Wala Tha

 

 

 

 

Ghar Sè Yèh Soch Kè Nikla Hon Kè Mar Jana Hai
Ab Koi Raah Dikha Day Kè Kidhar Jana Hai

 

 

 

rahat indori shayari in urdu text

rahat indori poetry on love

 

Collègè Kè Sab Bachay Chup Hain Kaghaz Ki Ik Nao Liyè
Charon Tarf Darya Ki Sorat Phèli Hoyi Bèkari Hai

 

 

 

 

Dosti Jab Kisi Sè Ki Jayè
Dushmano Ki Bhi Raayè Li Jayè

 

 

 

 

Bohat Ghuror Hai Darya Ko Apnè Honè Par
Jo Mèri Payas Sè Uljhè Tu Dhajyan Ur Jayèn

 

 

 

Raaz Jo Kuch Ho Isharoon Mèin Bta Bhi Dèna
Hath Jab Un Sè Milana Tu Daba Bhi Dèna
Submittèd By: khawar shabbir tanoli

 

 

 

 

Ab Tu Har Hath Ka Pathar Hmain Pèhchanta Hai
Umèr Guzri Hai Tèrè Shèhr Mèin Aatè Jaatè

 

 

 

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Aankh Mèin Pani Rakho Honton Pè Changari Rakho
Zinda Rèhna Hai Tu Tarkèbèn Boht Sari Rakhu

 

 

 

 

Bèmar Ko Marz Ki Dawa Dèni Chahyè
Mèin Pèta Hun Pila Dèni Chahyè

 

 

 

 

Ham Sè Pèhlè Bhi Musafir Kyi Guzrè Hon Gèy
Kam Sè Kam Rah Kè Pathar Tu Hatatè Jatè

 

 

 

 

Mèin Nè Apni Khusk Aankhon Sè Laho Chilka Diya
Ik Smandar Kèhta Tha Mujè Ko Pani Chahyè

 

 

 

 

Shakhon Sè Tot Jayèn Wo Pattè Nahi Hain Ham
Aandhi Sè Koi Kèh Dè Apni Auqat Mèin Rahè

 

 

Rahat Indori Poetry Status

 

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Raaz jo kuch hon, isharon main bata bhi dena,
Hath jab us se milana to dabbaa bhi dena..

 

 

 

 

Mari Khuwaush Hai Ky Angan Mai Na DIwar Uthy
Mary Bhai Mari Hisy Ki Zameen Rakh Ly

 

 

 

 

Roz Taron Ki Numaish MAi Khalal Padta HAI
Chand PAgal Hai Andhoraon mai Niakl PAdta HAi

 

 

 

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Arada Tha Ky MAi Khuch Dair Tufan Ka Maza Lata
Magar Bichary Dariya Ko Utar Jany Mai JAldi Thi

 

 

 

 

Hum Apni JAn Ky Dushman Ko APni Jan KAhty HAi
Muhabbat Ki Is Mitti Ko Hindustan KAhty Hai

 

 

 

 

Yeh Zarori HAi Ky Ankhon KA Baharam qaim RAhy
Need Rakho Ya Na Rakho Khwab Miyari Rakho

 

 

 

 

Mug MAi Rony KA Saliqa b Nahi Hai Shyad
Log HAnsty Hai Mughy Dailkh Kar Aty Jaty

 

 

 

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Log HAr Mord Py Ruk Ruk Ky sanmblty Q Hai
Itna Darty HAi Phr GAr Sy Niklaty Q Hai

 

 

 

 

Do Ghaz Sahi Magar Yeh Mari Malkiyat To HAi
Ay Mout Tu N y Mug Ko Zamidar Kar Dia

 

 

 

Bulati HAi MAgar Jany Ka Nai
Wo Dunia Hai Udar Jany ka NAi

 

Rahat Indori poetry on love

 

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MAi AKhir Kon Sa MAusam Tary Naam Kar Data
Yaha HAr Ek Mosam Ko Guzar Jany Ki Jaldi Hai

 

 

 

 

 

مسجدوں کے صحن تک جانا بہت دشوار تھا
دیر سے نکلا تو میرے راستے میں دار تھا

 

 

 

 

Wo Chatha Tha kY Kassa Khard Ly Mara
Mai Is Ky Taj Ki Qemat Laga Ky Laut Aya

 

 

 

 

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آنکھ میں پانی رکھو ہونٹوں پہ چنگاری رکھو
زندہ رہنا ہے تو ترکیبیں بہت ساری رکھو

 

 

 

 

Rah Ky Pathar SY Bardh Ky Khuch NAi Hai MAnzly
Rasty Awaz Daty Hai safar JAri Rakho

 

 

 

 

بیٹھے بیٹھے کوئی خیال آیا
زندہ رہنے کا پھر سوال آیا

 

 

 

تیری ہر بات محبت میں گوارا کر کے
دل کے بازار میں بیٹھے ہیں خسارہ کر کے
Tari HAr Bat Muhabbat Mai Gawara KAr Ky
Dil Ky BAzar MAi Bathy Hai Khasara Kar Ky

 

 

 

 

جھوٹوں نے جھوٹوں سے کہا، سچ بولو
سرکاری اعلان ہواہے، سچ بولو

 

 

 

 

چہروں کی دھوپ آنکھوں کی گہرائی لے گیا
آئینہ سارے شہر کی بینائی لے گیا

 

 

 

 

شام نے جب پلکوں پہ آتش دان لیا
کچھ یادوں نے چٹکی میں لوبان لیا

 

 

Rahat Indori Biografy. 

 

There was a rumor that I was not feeling well. People made me sick by asking.

راحت اندوری کا شعر ” کسی کے باپ کا ہندوستان تھوڑی ہے”

So Rahat wrote wonderful poetry, lyrics, and songs. Rahat Andoori, who touched the heights of Urdu poetry, is no longer with us. Rahat indori G. coronavirus was found positive in August 2020. On August 11, 2020, he was admitted to AUROBINDO HOSPITAL – and on the evening of the 11th, he said goodbye to this world.

Rahat indori Ji is no longer with us but tells us about his everlasting poetry songs and lyrics that have always been on the tongues of the people and will continue to be so. In today’s post, we get to know the king of Urdu poetry, Rahat indori Jeevan, a little more closely.Dosto story started on January 1, 1950, when Rahat indori ji was born in Indore – Rahat indori whose real name is Rahat Qureshi .But he loved his indori city very much – so he made it a part of his name – his father’s name was RAFATULLAH QURESHI who was a worker in a textile mill and his mother’s name was Maqbool Begum -Due to poor home conditions, Rahat Sahib started working as the age of fewer than ten years. Later on,

He started liking his work and he also started to be known as a good painter. Rahat Andoori Ji completed his graduation from Islamia College. Complete And in 1975, contact the cumbersome university of Man Pardes for the population of Ph.D. in Urdu literature. For their THISES, they were also given the title of Mushaira in Urdu in 1985. Rahat indori He celebrated Indian Sanskrit with great pomp and ceremony in almost every district of India. And let me tell you, Rahat indori has been performing in Mushaira and tribes for the last 45 years.In 2017, Rahat indori also appeared in Sony TV’s popular TV show Kapil Sharma and was loved by the same people there. And for some time now, he been calling it a great poem, but it’s not going to be very popular.

people have made great videos about it, made news, and enjoyed it. Rahat indori ji has also acted as a song in many Bollywood films, including Ghatak Mission Kashmir Muna Bhai MBBS Murder. apart from this, Rahat indori has also written many books and before that he had also released his biography book – the name of this book was Rahat Sahib. Very few people know but Rahat indori is a good player along with his poetry. There were also captains of football and hockey teams at my school and college levels. Ever since the news of Rahat indori’s attention, his loved ones have been shaken and the cause of Rahat indori’s death has been Corna virus, while according to the thought received from the hospital, Rahat ji attention was due to a heart attack . The year 2020 is really going badly. We have lost a much better Yen artist than this. I would like to say a few lines of poetry written by Rahat indori.

 

 

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