Gulzar poetry | Gulzar Poetry In Hindi & Urdu On Love | Gulzar Shayari life|

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Gulzar Poetry In Hindi on Life

 

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एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा…

 

 

 

लकीरें हैं तो रहने दो
किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खींच दी थी

 

 

 

छोटा सा साया था, आँखों में आया था
हमने दो बूंदों से मन भर लिया…

 

 

 

सामने आया मेरे, देखा भी, बात भी की
मुस्कुराए भी किसी पहचान की खातिर…
कल का अखबार था, बस देख लिया, रख भी दिया

 

 

बेहिसाब हसरते ना पालिये
जो मिला हैं उसे सम्भालिये…

 

gulzar shayari in hindi 2 lines on life

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वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं,
हम भूल गए हैं रख के कहीं

 

 

 

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं

 

 

 

कभी तो चौक के देखे वो हमारी तरफ़,
किसी की आँखों में हमको भी वो इंतजार दिखे

 

 

पलक से पानी गिरा है,
तो उसको गिरने दो
कोई पुरानी तमन्ना,
पिंघल रही होगी

 

 

 

कैसे करें हम ख़ुद को
तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं,
तो तुम शर्ते बदल देते हो

 

 

 

किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,
इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं

 

 

gulzar shayari on life in hindi

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तन्हाई की दीवारों पर
घुटन का पर्दा झूल रहा हैं,
बेबसी की छत के नीचे,
कोई किसी को भूल रहा हैं

 

 

 

शोर की तो उम्र होती हैं
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं

 

 

 

वक्त रहता नहीं कही भी टिक कर,
आदत इसकी भी इंसान जैसी हैं

 

 

 

 

बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है

 

 

 

कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना

 

Gulzar life quotes in hindi

 

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आदमी बुलबुला है पानी का
और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है,
फिर उभरता है, फिर से बहता है,
न समंदर निगला सका इसको, न तवारीख़ तोड़ पाई है,
वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का।

 

 

 

 

बीच आसमाँ में था
बात करते- करते ही
चांद इस तरह बुझा
जैसे फूंक से दिया
देखो तुम….
इतनी लम्बी सांस मत लिया करो

 

 

 

सूरज झांक के देख रहा था खिड़की से
एक किरण झुमके पर आकर बैठी थी,
और रुख़सार को चूमने वाली थी कि
तुम मुंह मोड़कर चल दीं और बेचारी किरण
फ़र्श पर गिरके चूर हुईं
थोड़ी देर, ज़रा सा और वहीं रूकतीं तो

 

 

 

आओ तुमको उठा लूँ कंधों पर
तुम उचकाकर शरीर होठों से चूम लेना
चूम लेना ये चाँद का माथा
आज की रात देखा ना तुमने
कैसे झुक-झुक के कोहनियों के बल
चाँद इतना करीब आया है

 

 

 

 

हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते

 

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दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं

 

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा
देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,
जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा

 

 

 

शब्द नए चुनकर कविता हर बार लिखू
उन दो आँखों में अपना सारा प्यार लिखू
वो में विरह की वेदना लिखू या मिलन की झंकार लिखू
कैसे इन चंद लफ्जो में दोस्तों अपना सारा प्यार लिखू

 

 

 

ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं
ना पास रहने से जुड़ जाते हैं
यह तो एहसास के पक्के धागे हैं
जो याद करने से और मजबूत हो जाते हैं

 

 

 

एक सो सोलह चाँद की रातें
एक तुम्हारे कंधे का तिल
गीली मेहँदी की खुश्बू
झूठ मूठ के वादे
सब याद करादो, सब भिजवा दो
मेरा वो सामान लौटा दो

 

 

 

कुछ अलग करना हो तो
भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं
मगर पहचान छिन लेती हैं

 

 

 

gulzar love shayari in hindi 2 lines

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अच्छी किताबें और अच्छे लोग
तुरंत समझ में नहीं आते हैं,
उन्हें पढना पड़ता हैं

 

 

सुनो…
जब कभी देख लुं तुमको
तो मुझे महसूस होता है कि
दुनिया खूबसूरत है

 

 

 

मैं दिया हूँ
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं

 

 

Gulzar Poetry in Urdu 2 Line

 

درد ہلکا ہے سانس بھاری ہے
جئے جانے کی رسم جاری ہے

dard halka hay sans bhari hay
jiye janay ki rasam jari ha

 

 

 

آئنہ دیکھ کر تسلی ہوئی
ہم کو اس گھر میں جانتا ہے کوئی

aaina dekh kar tasali hui
ham k0 iss ghar main janta ha k0i

 

 

 

ذکر ہوتا ہے جہاں بھی مرے افسانے کا
ایک دروازہ سا کھلتا ہے کتب خانے کا

zikar h0ta hay jahan bhi mery fasany ka
ik darwaza sa khulta ha kutb khany ka

 

 

شام سے آنکھ میں نمی سی ہے
آج پھر آپ کی کمی سی ہے

sham say aankh main nami si ha
aaj phir aap ki kami si ha

 

 

صبر ہر بار اختیار کیا
ہم سے ہوتا نہیں ہزار کیا

sabr har bar ikhtiya kiya
ham say h0ta nahi hazar kiya

 

 

gulzar sahab shayari on love

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وقت رہتا نہیں کہیں ٹِک کر
عادت اِس کی بھی آدمی سی ہے

waqt rehta nahi kahin tik kar
aadat iss ki bhi aadmi si hay

 

 

 

ایسا خاموش تو منظر نہ فنا کا ہوتا
میری تصویر بھی گرتی تو چھناکا ہوتا

aisa kham0sh tu manzar na fana ka h0ta
meri tasveer bhi girti tu chanaka h0ta

 

 

زندگی یوں ہوئی بسر تنہا
قافلہ ساتھ اور سفر تنہا

zindagi y0un hui basar tanha
kafla sath aur safar tanha

 

 

 

مجھے اندھیرے میں بے شک بٹھا دیا ہوتا
مگر چراغ کی صورت جلا دیا ہوتا

mujhy andhery main beshak bitha diya h0ta
magar charagh ki surat jala diya h0ta

 

 

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آپ کے بعد ہر گھڑی ہم نے
آپ کے ساتھ ہی گزارا ہے

aap kay baad har ghari ham nay
aap kay sath hi guzara ha

 

 

اپنے سائے سے چونک جاتے ہیں
عمر گزری ہے اس قدر تنہا

apnay saye say ch0nk jatay han
umer guzri ha iss qadar tanha

 

 

راکھ کو بھی کرید کر دیکھو
ابھی جلتا ہو کوئی پل شاید

rakh k0 bhi kureed kar dekh0
abhi jalta h0 k0i pal shayad

 

آگ میں کیا کیا جلا ہے شب بھر
کتنی خوش رنگ دکھائی دیتی ہے

aag main kiya kiya jala hay shab bhar
kitni khush rang dikhai deti hay

 

 

gulzar shayari in hindi 2 lines on life

Gulzar Poetry On Life

 

دِن گُزرتا نہیں ہے لوگوں میں
رات ہوتی نہیں بسر تنہا

din guzarta nahi hai l0g0n main
raat h0ti nahi basar tanha

 

 

رُکے رُکے سے قدّم رُک کے بار بار چلے
قرار دے کے تیرے ، در سے بے قرار چلے

rukay rukay say qadam ruk ruk kay bar bar chalay
qarar daay kay teray ddar say beqarar chalay

 

 

پیڑ پر پک گیا ہے پھل شاید
پھر سے پتھر اُچھالتا ہے کوئی

pairr per pak giya hai phal shayad
phir say pathar uchalta hai k0i

 

 

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Gulzar Poetry on Love In Hindi

 

 

کوئی خاموش زخم لگتی ہے
زندگی ایک نظم لگتی ہے

k0i kham0sh zakham lagti hai
zindagi aik nazam lagti hai

 

 

ہم نے دروازے تک تو دیکھا تھا
پھر نہ جانے گئے کِدھر تنہا

ham nay darwazy tak tu dekha tha
phir na janay gaye kidhar tanha

 

 

دِل میں کچھ یوں سنبھالتا ہوں غم
جیسے زیور سنبھالتا ہو کوئی

dil main kuch y0un sanbhalta h00n gham
jaisy zewar sanbhalta h0 k0i

Gulzar Poetry on waqt

 

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gulzar poetry on love

 

 

maiñ uḌte hue panchhiy0ñ k0 Darātā huā
kuchaltā huaa, ghaas kī kalġhiyāñ
girātā huā gardaneñ in daraḳht0ñ kii, chhuptā huā
jin ke pīchhe se
niklā chalā jā rahā thā v0 sūraj
ta.āqub meñ thā us ke maiñ!
giraftār karne gayā thā use
j0 le ke mirī umr kā ek din bhāgtā jā rahā thaa!

 

 

Gulzar Poetry on Love in Urdu

 

 

Tumahray Khawab Se Har Shab Lapat Ke S0tay Hain
Sazayen Bhaij D0 Hum Ne Khataien Bhaiji Hain

 

 

 

 

Ruke Ruke Se Qadam Ruk Ke Baar Baar Chalay
Qarar Day Ke Tre Dar Se Be Qarar Chalay

 

 

 

gulzar shayari on life in hindi

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W0h Aik Din Aik Ajnabi K0
Meri Kahani Suna Raha Tha

 

 

Khushbu Jaisay L0g Miley Afsaanay Mein
Aik Purana Khat Kh00la Anjanay Mein

 

 

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Ham Ne Aksar Tumhari Rah0n Mein
Ruk Kar Apna Hi Intezzar Kia

 

 

Dil Par Dastak Dene K0n Aa Nikla Hai
Kis Ki Aahat Suntan Hun Werane Mein

 

 

 

Chand Umeedain Nich0ri Thi Tu Aahen Tapki
Dil K0 Piglaen Tu H0 Sakta Hai Sansen Niklen

 

 

Apne Saye Se Ch0nk Jate Hain
Umar Guzri Hai Is Qadar Tanha

 

 

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Din Kuch Aesy Guzarta Hai K0i
Jese Ehsaan Utarta Hai K0i

 

 

 

Aap Ke Bad Har Garhi Ham Ne
Aap Ke Sath Hi Guzari Hai

 

 

gulzar shayari in hindi 2 lines

 

 

 

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ

 

 

 

 

यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता

 

 

 

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आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

 

 

 

 

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

 

 

 

 

आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

 

 

 

 

तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं

 

 

 

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हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

 

 

 

 

ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है

 

 

 

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काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी
तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी

 

 

 

 

खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है

 

 

 

 

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

 

 

 

 

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था

 

 

 

 

कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है

 

 

 

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काई सी जम गई है आँखों पर
सारा मंज़र हरा सा रहता है

 

 

 

 

उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये पैरहन उतार चले

 

 

 

 

 

सहर न आई कई बार नींद से जागे
थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले

 

 

 

 

कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया
जब भी अपनी रह चलने की कोशिश की

 

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कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

 

 

 

 

कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

 

 

 

 

आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद

 

 

 

बहुत अंदर तक जला देती हैं,
वो शिकायते जो बया नहीं होती

 

 

 

 

क सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं

 

 

 

 

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तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं

 

 

 

 

घर में अपनों से उतना ही रूठो
कि आपकी बात और दूसरों की इज्जत,
दोनों बरक़रार रह सके

 

 

 

 

कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें

 

 

 

 

कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे

 

 

 

 

शायर बनना बहुत आसान हैं
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए

 

Gulzar Shayari in Hindi on friendship

 

ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ
बस बचपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं

 

 

 

 

बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे हैं

 

 

 

 

कुछ जख्मो की उम्र नहीं होती हैं
ताउम्र साथ चलते हैं, जिस्मो के ख़ाक होने तक

 

 

 

 

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

 

 

 

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कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता

 

 

 

 

समेट लो इन नाजुक पलो को
ना जाने ये लम्हे हो ना हो
हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल
उन पलो में हम हो ना हो

 

 

 

 

उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे

 

 

 

Gulzar Short History

Gulzar Naseem is a name that is unique. Gulzar’s real name for films for his best songs is Sampiran Singh Kalra. He was born on August 18, 1944 in the village of Dina in Lake District Which is now in Pakistan.He worked as a garage mechanic before coming to the movies.Gulzar started writing at an early age but his son did not like it.

But still he continued to write and one day due to his hard work he has become a big name in Bollywood.He gave the sign for the 1973 film Koshish.He had worked as an assistant with Bimal Rai in the Bengali film Apna Jin.What he wrote for the film to reveal to us is still heard in nine schools today.In this way, a poet offered immense love, whose heart was pounding.

He wrote a whole poem in the name of Rakhi in one night.He wrote songs for the films of Azan Rahi before the wedding.What is the real name of Gulzar Sahib? There are rumors of fun poetry but how did this request come into Gulzar’s life? The answer to this question is also his own story. He was fond of writing. Like every time, he knew that Gulzar should stop quitting writing and become a picture joker. So Gulzar Sahib changed his name. He started writing and became known as Rakha. He lives among us today and his poetry is not presented in the country. He is also old

 

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